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लखनऊ की अवैध बिल्डिंग में लगी आग, 15 की मौत
- दैनिक लोक भारती
- 22 Jun, 2026
लखनऊ। नई दिल्ली में हुए हादसे के अभी एक माह भी पूरे नहीं हुए थे कि लखनऊ के सेक्टर डी स्थित रेजिडेंशियल कॉलोनी में लखनऊ विकास प्राधिकरण जोन 4 के इंजीनियरों की मेहरबानी से अवैध कामर्शियल बिल्डिंग में आग लग गई। अलीगंज के उषा मेहता मार्ग बी2 सेक्टर-डी के बेसमेंट समेत चार मंजिला अवैध बिल्डिंग में लगी आग में 15 लोगों के मरने की पुष्टि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने की है। सोमवार को लखनऊ के अलीगंज सेक्टर डी क्षेत्र में एक बहुमंजिला व्यावसायिक भवन में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई। यह अवैध बिल्डिंग विजय शुक्ला की बताई जा रही है। मृतकों में अधिकांश 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवक-युवतियां थीं। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है और भवन में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों के अनुसार दोपहर में अचानक आग लग गई, जिसके बाद कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में घना धुआं और लपटें फैल गईं। भवन के अंदर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे बाहर निकलने का रास्ता खोजने लगे।
स्थानीय लोगों के अनुसार अवैध भवन के भूतल पर एक पालतू पशुओं की दुकान (अलीगंज पेट शॉप) तथा ऊपरी मंजिल पर एक एनीमेशन इंस्टीट्यूटऔर गेमिंग जोन हेड हॉपर्स संचालित था। अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी मंजिल पर गेमिंग सॉफ्टवेयर से जुड़ा कार्य किया जाता था। जिसमें करीब 27 बच्चे मौके पर मौजूद थे। बिल्डिंग के अंदर की सास सजावट फाइबर और प्लास्टिक के सामानों से की गई थी, जिससे आग पकड़ने और जलने में बहुत कम समय ही लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग तेजी से फैल गई और ऊपरी मंजिल पर फंसे लोगों में भगदड़ मच गई। कुछ लोग बालकनी और खिड़कियों के रास्ते बाहर निकलने का प्रयास करते दिखाई दिए। एक व्यक्ति ने जान बचाने के लिए भवन से छलांग लगा दी, जिससे वह घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पास की दुकान में काम करने वाले अमित शुक्ला ने बताया कि आग बेहद भीषण थी। दमकल कर्मियों, पुलिस और स्थानीय लोगों ने कई घंटों तक राहत एवं बचाव कार्य चलाया और आग पर काबू पाया। उन्होंने बताया कि कुछ युवाओं ने अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से छलांग लगाई, जिससे वे घायल हो गए।
घटनास्थल पर अपने भतीजे की तलाश कर रहे राजेश कुमार ने कहा कि उनका भतीजा गेमिंग जोन में काम करता था और अभी तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कई युवाओं को ऊपरी मंजिल पर फंसा देखा था और कुछ लोग जान बचाने के लिए नीचे कूद रहे थे।
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति जलती हुई इमारत से टूटी खिड़की के रास्ते नीचे उतरने का प्रयास करता दिखाई दे रहा है। नीचे उतरते समय उसका संतुलन बिगड़ गया और वह गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
पुलिस और जिला प्रशासन ने बताया कि आग लगने के कारणों तथा सुरक्षा मानकों में संभावित लापरवाही की जांच की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि भवन में अग्नि सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया था या नहीं। बताया जाता है कि पहले इस बिल्डिंग को सील कर दिया गया था लेकिन उसके बाद जॉन कर के जोनल अधिकारी के साथ ही जूनियर इंजीनियर विवेक पटेल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश सक्सेना और अविरेन्द्र इतिहास ने अपने-अपने कार्यकाल के दौरान मिली भगत से लाखों रुपए वही करते हुए बिल्डिंग को बनने दिया। मानकों को ताख पर रखकर बिल्डिंग को बेसमेंट के साथ में ही शुरुआत करने की परमिशन दे दी थी।
उपमुख्यमंत्री ने जताया दुख
लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्थिति पर नजर रखते हुए कहा कि मृतकों में अधिकांश 20 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवा थे। उन्होंने बताया कि प्रशासन घटना के कारणों की जांच कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने बीच में छोड़ा अलीगढ़ दौरा
लखनऊ। घटना की गंभीरता को देखते हुए योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए और पुलिस महानिदेशक तथा अपर मुख्य सचिव (गृह) को घटनास्थल पर भेजकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
अलीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें लखनऊ में हुई इस दुखद घटना की जानकारी मिली है, जिसमें कई बच्चों और युवाओं की जान चली गई है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर लखनऊ लौटने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी। इसके बाद जैसे ही मुख्यमंत्री शाम 6:00 बजे लखनऊ पहुंचे वह तुरंत मौके पर देखने आए और बचाव कार्य को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री ने मुआवजे की घोषणा की
लखनऊ। नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से घोषणा की गई कि:
प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। प्रत्येक घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। यह हादसा लखनऊ के हाल के वर्षों की सबसे दुखद अग्नि दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों की स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
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